अजीब इतेफाक था उसको भी किसी से ‘इश्क़’ हुआ था।
गुलजार की शायरी में जिंदगी की वो बारीकियाँ होती हैं, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। उनकी लिखी शायरी हमें जीवन के छोटे-छोटे पलों में छिपे बड़े सबक सिखाती है, जिसमें एक अलग ही मिठास और गहराई होती है।
समझ ती तुम भी ना सके बिना कुछ जानै रिश्ता तौड़ गप।
भावनाओं से भरी ये शायरी जीवन के हर मोड़ पर दिल को छू जाती है। इसमें उम्मीद, प्यार, दर्द, और जज्बात का मिला-जुला रूप देखने को मिलता है, जो हमें अपने दिल की गहराइयों से सोचने पर मजबूर कर देता है।
ये तो मेरे बच्चे की जिद थी जल्दी आने की ।।
हर रोज़ टूटकर भी मुस्कुराना पड़ता है,क्योंकि किसी को हमारी तन्हाई से क्या लेना देना।
तु HINDI SHAYARI कितनी भी खुबसुरत क्यूँ ना हो ऐ जिंदगी
तुझे सोचकर मुस्कुराना ही काफी है,प्यार जताने के लिए अब लफ्ज़ नहीं चाहिए। ❤️
मैं दिया हूँ! मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं
जिन्हें मै छोड़ देता हूं, फिर उनका जिक्र खो देता हूं..
एक तरफ वो जा रही थी, एक तरफ में जा रहा था
मैं अपने अलगाव का कारण दुर्भाग्य को बताऊंगा۔
तू जब साथ होता है तो हर ग़म छोटा लगता है,तेरे बिना तो हँसना भी रोना लगता है। ❤️
लबों पर मुस्कान और आंखों में नमी ले आती हैं।”